शार्ट स्टोरी लेखन चेलैन्ज भाग 4 प्यार या जिम्मेदारी
"पीहू अब तो मेरी बात सुनलो ।मै तुम्हारी प्रतीक्षा कितने बर्षौ से कर रहा हूँ। तुम मेरी बात सुनती ही नहीं हो। जब भी कुछ बोलता हूँ तुम्हारा एक ही जबाब होता है साहिल अभी मेरे पास समय नही है।",साहिल पीहू से नाराज होता हुआ बोला।
" साहिल मैने तुमसे कितनी बार कहा है कि मेरी प्रतीक्षा मत करो। मेरा कोई भरोसा नहीं है । कोई अच्छा सा जीवन साथी देखकर अपना घर बसालो।लेकिन तुम भी मेरी बात सुनते ही नही हो।", पीहू साहिल से शिकायत करती हुई बोली।
"ऐसा कैसे हो सकता है कि मै अपना घर बसालू। यह तुमने सोच भी कैसे लिया? पीहू मै शादी करूँगा तो तुम्हारे साथ नहीं तो मै भी तुम्हारी तरह अकेला ही रहूँगा। " साहिल ने पीहू को जबाब दिया ।
पीहू साहिल का जबाब सुनकर एकबार परेशान होगयी।
पीहू की कहानी भी बहुत ही दर्द भरी थी। यह उन दिनौ की बात है जब पीहू बारहवी कक्षा में पढ़रही थी कोई कमी नही थी उसके पापा की किसी प्राईवेट कम्पनी में जाब थी ।
पीहू की एक छोटी बहिन और सबसे छोटा एक भाई था। इस तरह वह दो बहिनै व एक भाई थे। भाई बारह बर्ष का था । पीहू के साथ साहिल भी पढ़ता था ।
साहिल एक सम्पन्न परिवार से था। वह पीहू को बहुत प्यार करता था ।साहिल ने अपने मम्मी पापा को बता दिया था कि वह पीहू से प्यार करता है और शादी उसीसे करेगा। उसके मम्मी पापा की तरफ से हाँ थी। दौनौ परिवार इसके लिए तैयार थे।
परन्तु हौना तो कुछ और ही था। पीहू के पापा की हार्ट अटैक से मौत होगयी। पीहू बडी़थी सारी जिम्मेदारी पीहू के कन्धौ पर आगयी। उसकी पढा़ई छूट गयी । उसने एक स्कूल में नौकरी करली।एवं घर बच्चौ को ट्यूशन पढा़ती थी।
अब पीहू अपना सब कुछ भूल गयी बहिन को पढा़या भाई को एम बी ऐ करवाई। फिर बहिन की शादी करदी। पीहू लड़का बनके सभी काम सम्भालती थी।
वह अपनी शादी की बात भूल गयी। भाई की नौकरी लग गयी। अब उसने उसकी भी शादी करदी । भाई इतना निकम्मा निकला कि अपनी पत्नी को लेकर अलग रहने लगा।
पीहू की मम्मी बीमार रहती थी पीहू का भाई माँ को लेजाने के लिए भी तैयार नही था वह भी पीहू की जिम्मेदारी थी।
साहिल के पीहू को बहुत बार समझाया था कि यह काम हम दौनौ शादी के बाद मिलकर भी कर सकते है। परन्तु पीहू इसके लिए तैयार नही हुई।
अब साहिल ने उसे समझाते हुए कहा कि पीहू अबतो सब कुछ पूरा होगया है। अब शादी के बाद माँ हम दौनौ के पास ही रहेगी।
पीहू साहिल के बार बार कहने से तैयार हुई । जब पीहू व साहिल की शादी हौने जारही थी तब उसका निकम्मा भाई अपना हिस्सा मांगने आगया।
पीहू की मम्मी ने अपने बेटे को डाँटते हुए कहा," तू मेरा बेटा हो ही नही सकता। आज के बाद मैं तेरा मुँह देखना भी पसन्द नही करूगी। जिस बहिन ने अपना सुख भूलकर तुम सबको पढाया उसका यह बदला चुकाया वह अपनी शादी करके भी अपना घर बसालेती तब तुम्हारी देखभाल कौन करता ।तू अपनी पत्नी लेकर अलग होगया मेरी देख रेख कौन करेगा।और आज अपना हिस्सा लेने आया है। तुझे कुछ नही मिलेगा मै सब कुछ बृद्धाश्रम में देकर वही रहूँगी।" इतनख कहकर उसकी माँ ने दरवाजा बन्द कर लिया।
इसके बाद पीहू व साहिल की शादी हुई ।पीहू अपनी माँ कोभी अपने साथ लेगयी ।
नरेश शर्मा
27/04/२०२२
शार्ट स्टोरी लेखन चेलैन्ज भाग ४
जानर
स्त्री विशेष
Abhinav ji
17-May-2022 07:23 AM
Nice👍
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Naresh Sharma "Pachauri"
29-Apr-2022 08:53 PM
सभी साथियौ को बहुत बहुत धन्यवादजी
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Seema Priyadarshini sahay
28-Apr-2022 08:50 PM
बहुत खूब लिखा आपने
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